सरकार 14 प्रतिषत आरक्षण पर सवर्णों को लालीपोप पकडा रही है- पं. सुरेष मिश्रा, अगर नियत साफ है तो 5 प्रतिषत गुर्जरो को 14 प्रतिषत सर्वणों को दोनों का विधेयक एक साथ ही लाया जाये ,आरक्षण के लिये सवर्ण जातियां भी संघर्ष करेगीं

जयपुर 29 मई। राजस्थान में गुर्जर समाज के साथ कल रात हुये समझौते में 5 प्रतिषत गुर्जरों को अलग से देने का प्रस्ताव साथ ही मंत्रीमण्डल औरविधानसभा में नये सीरे से प्रस्ताव लाकर 9वीं अनुसूचि में जोडने के लिये प्रस्ताव बनाकर केन्द्र को भेजने की रणनीति बनाई है। साथ ही 14 प्रतिषतसवर्णों के लिये अलग से बिल बनाने की बात कही है।

सर्व ब्राह्मण महासभा के प्रदेषाध्यक्ष एवं सवर्ण आरक्षण मंच के संयोजक पं. सुरेष मिश्रा ने इसे सवर्णों को लालीपोप देने जैसी बात कही है।मिश्रा ने कहा है कि जब वर्ष 2008 में विधानसभा में 5 प्रतिषत और 14 प्रतिषत का प्रस्ताव सभी राजनैतिक दलों की सहमति से एक साथ पारित हो गयाथा तो ऐसी परिस्थिति में अब दोनों बिलों को अलग करने का क्या औचित्य है। कल के गुर्जर समुदाय के साथ दबाव में हुये समझौते से साफ जाहिर होताहै कि सरकार 5 प्रतिषत का फैसला तो करना चाहती है लेकिन 14 प्रतिषत आरक्षण के मामले को लम्बित रखना चाहती है। क्योंकि 5 प्रतिषत को 9वींअनुसूचि में जोड रहे है जिसे की भविष्य में यह मामला न्यायालय में नही जा सके और 14 प्रतिषत आर्थिक रूप से पिछडे सवर्णों को इससे अलग रखा जारहा है। मिश्रा ने कहा है कि यह बडी ही विडम्बना है कि समाज को बांटने की इस संवेदनषील मुद्दे में एक साजीष रची जा रही है जब एक बिल से हीफैसला हो सकता है तो क्यों इसे बांटा जा रहा हैं

 

 

 

मिश्रा ने कहा है कि अगर सरकार की नियत साफ है तो विधानसभा में 2008 में पारित हुये प्रस्ताव पर ही कोर्ट में सरकार अपना पक्ष मजबूतीसे रखती है तो निष्चित रूप से फैसला गुर्जरों और सवर्ण जातियों के हित में आता। मिश्रा ने कहा की हमे अंदेषा इस बात का है कि जब भारत के संविधानमें साफ कहा गया है कि आरक्षण किसी भी स्थिति में 49 प्रतिषत से ऊपर नहीं होना चाहिये। जिससे की सामान्य मैरिट में आने वालों को कम से कम 51प्रतिषत का लाभ तो प्राप्त हो लेकिन अब यदि सर्वणों को 14 प्रतिषत अलग करके 5 प्रतिषत को 9वीं अनुसूचि में डाला जायेगा तो यह हमारे साथसरासर अन्याय है। मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकारें लगातार तमिलनाडु का उदाहरण देती है जिसमें की 50 प्रतिषत के ऊपर आरक्षण की व्यवस्था हैलेकिन यह व्यवस्था मण्डल आयोग व वर्ष 1992 से पहले की व्यवस्था है।

 

मिश्रा ने कहा है कि यदि सरकार सामान्य वर्ग को 14 प्रतिषत आरक्षण देना चाहती है तो दोनो बिलों को एक साथ लाया जाये तथा दोनो बिलोंको 9वीं अनुसूचि में जोडा जाये अन्यथा सवर्ण जातियां पिछले 15 वर्षो से एक लम्बा संघर्ष कर रही और हम फिर से संघर्ष करेगें वर्ष 2001 से 2007 तकलाखों लाख ब्राह्मणों एवं सवर्ण जातियों की आरक्षण रेलियां हुई है। 19 अगस्त 2007 को ब्राह्मणों पर लाठी चार्ज हुआ तब तत्कालिन सरकार ने एकआर्थिक आधार पर आरक्षण आयोग बनाया और विधानसभा मे पारित करवाया अब इसे फिर टालने का प्रयास किया तो हम सडकों पर आकर संर्घषकरेगें। मिश्रा ने कहा कि हम गुर्जरों के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं लेकिन अपना हक भी नहीं छोडेगें और गुर्जर समाज को भी समझायेंगें की यह बांटनंेका काम किया जा रहा है। जिसमें की गुर्जर समाज को कुछ नहीं मिलने वाला है।