सचिन पायलट ने की निन्दा

जयपुर, 30 मई। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने बिजली कम्पनियों द्वारा तीन महिने में चौथी बार गत् वर्षके पूर्व भुगतानित बिलों पर फ्यूल सरचार्ज को वर्तमान बिलों में जोड़े जाने की कड़े शब्दों में निन्दा की है।

पायलट ने आज एक बयान जारी कर कहा कि फरवरी से मार्च, 2015 के विद्युत बिलों में 2014 जनवरी से जून के पूर्व भुगतानित बिलों काफ्यूल सरचार्ज वसूला गया था, इसी प्रकार जून से अगस्त, 2014 के फ्यूल सरचार्ज की वसूली अप्रेल व मई, 2015 में की गई और अबजयपुर डिस्कॉम अक्टूबर, 2014 से दिसम्बर, 2014 तक उपभोग की गई बिजली पर फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ता से 200 से 400रूपये तक की ज्यादा वसूली करेगा जिसके पेटे बिजली कम्पनियों को फ्यूल चार्ज के आधार पर 250 करोड़ रूपये का फायदा होगा, जिसमेंअकेले जयपुर डिस्कॉम 100 करोड़ रूपये की वसूली उपभोक्ताओं से करेगा। उन्होंने कहा कि जयपुर डिस्कॉम सहित अन्य बिजलीकम्पनियां गत् दो महिनों में जनवरी, 2014 से दिसम्बर, 2014 तक वसूले गये बिजली के बिलों पर फ्यूल सरचार्ज के नाम पर 250 से 700रूपये की वसूली की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की गलत नीतियों के चलते पहले से ही बढ़े हुए टैरिफ व ऐरियर के कारणउपभोक्ताओं पर ज्यादा भार पड़ चुका है, ऐसे में गत् वर्ष के भुगतानित बिलों के फ्यूल सरचार्ज को वर्ष 2015 के बिलों में जोडक़र सरकारबढ़ी हुई मॅंहगाई के इस दौर में उपभोक्ताओं की जेब काटने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि वर्ष 2014 व 2015में हुए निकाय व पंचायत राज चुनावों के दौरान राज्य सरकार व विद्युत कम्पनियां बिजली चोरी की अनदेखी करती रही, नतीजतनचुनाव के दौरान विद्यतु चोरी 7 प्रतिशत बढ़ी और 1800 करोड़ रूपयों की विद्युत छीजत का भी सरकार व विद्युत कम्पनियों के पासकोई रिकॉर्ड नहीं है। अब इस प्रशानिक अकुशलता को छुपाने व विद्युत कम्पनियों के घाटे को पाटने के लिए सरकार ने अलोकतांत्रिकप्रक्रिया अपनाकर जनता पर गत् वर्ष के पूर्व भुगतानित बिलों पर फ्यूल सरचार्ज के नाम पर वसूली का गलत रास्ता निकाला है। उन्होंनेकहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार प्रशासनिक व्यवस्थाओं की निगरानी करने में विफल रही है और अपनी इस विफलता को दबाने के लिएजनता पर अतिरिक्त करों का भार डालकर मॅंहगाई को बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को बढ़ी हुई दरों में कटौती करजो अधिकारी विद्युत छीजत व चोरी को रोक पाने में कोताई बरत रहे हैं उनके खिलाफ कड़े अनुशासनात्मक कदम उठाने चाहिए ताकिजनता को आर्थिक शोषण से बचाया जा सके।