बैंक कर्मियों से परेशान ,आत्हत्या को उतारू किसान स्टेटमेंट चाहिए तो आरटीआई लगाओं

बैंक कर्मियों से परेशान ,आत्हत्या को उतारू किसान
स्टेटमेंट चाहिए तो आरटीआई लगाओं
पाली। मरूधरा ग्रामीण बैंक की पाली ब्रांच का हैरत अंगेज करने वाला कारनामा सामने आया है। कई सालों से परेशान किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि और अकाल के कारण ऋण जमा कराने मेंं असक्षम रहा है। इसी वर्ष हुई फसल के कारण किसानों को कुछ राहत मिली है। लेकिन बैंक कर्मियों को किसानों का यह सुकून भी नहीं देखा जा रहा है, उन्हें मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जा रहा है। मामला पाली जिले के जैतारण तहसील के बलूंदा गांव का है। गांव के किसान 2002 में किसान ने दो लाख को ऋण लेकर एक लाख सत्तर हजार पुन: करने के उपरान्त वह दो लाख का किसान के्रडिट कार्ड ले रखा है। काफी वर्ष इस दरमियान किसान की आर्थिक ऋण जमा नहीं करवा पाया है।
लेकिन ग्राम के बैंक कर्मी किसान को बार बार रोडा एक्ट का हवाला देकर धमकाता है और किसान को दलाल व चपरासी द्वारा समझौता कर रिश्वत देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जब किसान ने बार बार चक्कर काटने पर भी उसे 2002 से लेकर आज तक का स्टेटमेंट नहीं दिया गया है। जब उसकी शिकायत उच्चाधिकारी से की गई तब देख लेने की धमकी दी गई। इसी कारण किसान परेशान होकर उसकी शिकायत करनी चाही ना तो उसे शिकायत पुस्तिका दी गई और न ही नंबर दिए गए। और ना ही सरकार द्वारा किसान हित के लिए योजनाओं को किसान तक पहुंचाया गया।
मुख्य प्रबंधक के कहने पर नहीं दिया गया स्टेटमेंट:
जब किसान हताश व निराश होकर मुख्य प्रबंधक जोधपुर माधोराम चौधरी के पास पहुंचा तब अपनी पीड़ा बताई। मुख्य प्रबंधक ने आश्वस्त किया कि वहां जाने पर स्टेटमेंट मिल जाएंगे। लेकिन एक माह गुजरने के बाद भी स्टेटमेंट नहीं दिया गया।
सीईओं नहीं उठा रहा फोन: किसान जब एक माह से परेशान होकर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसपी श्रीमाली से फोन किया तब उन्होंने भी फोन नहीं उठाया।
अतिरिक्त रिकवरी प्रबंधक का बेतुका बयान:
जब किसान पाली ब्रांच के अतिरिक्त रिकवरी प्रबंधक बीएल चौहान से मिला तब स्टेटमेंट निकालना चाहा तब कहा कि वे स्टेटमेंट नहीं दे सकते, आरटीआई के तहत मांगे।
मुख्य सचिव से बात करने पर प्रशासन आया हरकत में:
जब ओर से निराश होकर आखिर में किसान ने मुख्य सचिव तन्मय कुमार से बात की तब जाकर बैंक प्रशासन हरकत में आया और दो दिन में स्टेटमेंट देने का कहा।